मेरा गाँव

मेरे इस ब्लॉग की सबसे बड़ी मुख्य बात मेरे लिए ये है कि header में जो फोटो है मेरे**( गाँव)** की है .... यहाँ होते हुए भी अपने घर को हर रोज देखता हूँ ..........

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Saturday, 24 July 2010

श्यामे तन्हाई में .....


श्यामे तन्हाई में

लो फिर आज

उनकी याद आई है....

गुजरे

वक़्त की वो

हसीं तस्वीर उभर आई है...!!!

मंद जलते

चरागों की

मध्यम है रोशनी भी

अँधेरे घने है

ख़ामोशी सी छाई है

दूर ...

बिजलियाँ हैं,

टीम -तिमाते

तारों का घना बसेरा है

अपने

आसियाने में

तन्हाई ही तन्हाई है ....

श्यामे तन्हाई में

लो फिर आज

उनकी याद आई है........!!!

गुजारिश ....!

कितनी मुद्दत से
मिले है
न जाओ....तुम !
"खुसी से जी ले कुछ पल"
सजायेंगे
आशियाना अपनी
खुशियों का
हम तुम ,
बाँटेंगे सुख दुःख अपना
वरना दूर
घरोंदों मैं
सिसकती जिंदगी
को किसने
देखा है,
क्या पता ये वक़्त
आये ना आये फिर कभी ....

Wednesday, 21 July 2010

शब्द किस तरह कविता बनते हैं .....

विचारों के इस
विचित्र प्रवाह में
शब्द किस तरह कविता बनते हैं
इन शब्द को देखो

जैसे माला में
पिरो के फूलों
को शब्दों को को
पिरो के पंक्तियों में
शब्दों के इस नयें अर्थ को .....
सब्द किस तरह कविता बनते हैं
इन सब्दों को देखो

मन की इस असीमित
उड़न में
शब्द किस तरह बनते और विखरते हैं....
इन शब्दों को .....
शब्द किस तरह कविता बनते हैं
इन शब्दों को देखो

सागर से मोती चुन
शब्दों के समंदर से शब्दों को
चुन के फिर इन शब्दों ........
शब्द किस तरह कविता बनते हैं
इन शब्दों को देखो ...
इन शब्दों को देखो ......
इन शब्दों को देखो ........!